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रने के लिए करते हैं। वे परमेश्वर के वचनों के प्रसार से मिले अवसर का दोहन परमेश्वर का कार्य और उसकी प्रशंसा पाने के लिए करने की व्यर्थ आशा करते हैं। कितने ही वर्ष गुज़र चुके हैं, परंतु ये लोग परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने की प्रक्रिया में न केवल परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं, परमेश्वर के वचनों क... |
बहुधा परमेश्वर के वचनों में "परमेश्वर" की अगुआई प्राप्त करते हुए, वे उसकी गंभीर परवाह और उदार मंतव्य समझते प्रतीत होते हैं और साथ ही लगता है कि उन्होंने मनुष्य के लिए परमेश्वर के उद्धार और उसके प्रबंधन को भी जान लिया है, उसके सार को भी जान लिया है और उसके धार्मिक स्वभाव को भी समझ लिया है। इस नींव के आधार पर, वे परमेश्व... |
हैं, जितने उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव। इस तरह, हालाँकि वे लोग परमेश्वर के वचनों की आपूर्ति और पोषण में जीते हैं, फिर भी वे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने के मार्ग पर सचमुच चलने में असमर्थ हैं। इसका वास्तविक कारण यह है कि वे कभी भी परमेश्वर से परिचित नहीं हुए हैं, न ही उन्होंने उसके साथ कभी वास्तविक संपर्क या स... |
लेना-देना नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के वचनों के सतही अर्थ पर चाहे कितनी भी मेहनत से कार्य करे, वह सब व्यर्थ है : क्योंकि वह मात्र शब्दों का अनुसरण करता है, इसलिए उसे अनिवार्य रूप से मात्र शब्द ही प्राप्त होंगे। परमेश्वर द्वारा बोले गए वचन दिखने में भले ही सीधे-सादे या गहन हों, लेकिन वे सभी... |
है, स्वयं को अभिव्यक्त करता है और कार्य करता है। परमेश्वर के वचनों के वास्तविक अनुभवों से अलग, मनुष्य के पास परमेश्वर के वचनों और सत्य का कोई वास्तविक ज्ञान या अंतदृष्टि नहीं होती। ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से एक ज़िंदा लाश, पूरा घोंघा होता है, और स्रष्टा से संबंधित किसी भी ज्ञान का उससे कोई वास्ता नहीं होता। परमेश्वर की द... |
्चा समर्पण और प्रतिदान नहीं होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य में सच्ची आराधना और समर्पण नहीं होगा, मात्र अंधी मूर्तिपूजा और अंधविश्वास होगा; परमेश्वर के सच्चे ज्ञान के बिना मनुष्य परमेश्वर के तरीके के अनुसार कार्य नहीं कर पाएगा, या परमेश्वर का भय नहीं मानेगा, या बुराई का त्याग नहीं कर पाएगा। इसके विपरीत, मन... |
्रदान करे; यदि कोई परमेश्वर और उसके वचनों के रूबरू आना चाहता है, तो उसे पहले एक सरल और सच्चा हृदय, सत्य को स्वीकार करने की तत्परता, कष्ट झेलने की इच्छा, और बुराई से दूर रहने का संकल्प और साहस, और एक सच्चा सृजित प्राणी बनने की अभिलाषा रखनी चाहिए...। इस प्रकार कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए, तुम परमेश्वर के निरंतर करीब आते जाओ... |
प्रतिदान करना और उसके प्रभुत्व के प्रति समर्पित होना चाहते हो। तुम अब उसके द्वारा मार्गदर्शन किए जाने, पोषण दिए जाने, निगरानी किए जाने, उसके द्वारा देखभाल किए जाने से इंकार नहीं करते और न ही उसकी आज्ञा और आदेश का पालन करने से इंकार करते हो। तुम सिर्फ़ उसका अनुसरण करना चाहते हो, उसके साथ उसके आस-पास रहना चाहते हो, उसे अ... |
कृपा करें और पूरी तरह अश्रद्धालु हो जाएं। डरें मत। भय भी न खाएं। तर्क ही करना है, तो पूरा कर लें। कुतर्क की सीमा का भी कुछ संकोच न करें। पूरी तरह उतर जाएं अपनी अश्रद्धा में। वह पूरी तरह उतर जाना ही आपको नरक में ले जाएगा। और नरक में जाए बिना नरक से कोई छुटकारा नहीं है।
और दूसरों की बातें मत सुनें। क्योंकि अधकचरी दूसरों ... |
ा हिस्सा कुछ कहता है। तीसरा मन का हिस्सा कुछ कहता है।
एक देवी मेरे पास आज सुबह ही आई थीं। कहती हैं कि बीस साल से ईश्वर की खोज कर रही हैं। मैंने उनसे कहा कि कल सुबह चौपाटी पर ध्यान के लिए पहुंच जाएं छः बजे। उन्होंने कहा, छः बजे आना तो बहुत मुश्किल होगा।
बीस साल से ईश्वर की खोज चल रही है! सुबह छः बजे चौपाटी पर आना मुश्कि... |
ै!
लेकिन तुम्हारी आस्तिकता तक झूठी है। और जिसकी आस्तिकता तक झूठी है, वह कैसे परमात्मा तक पहुंच सकता है! धार्मिकता भी झूठी है, ऊपर-ऊपर है। जरा - सा खोदो, तो हर आदमी के भीतर नास्तिक मिल जाता है। बस, ऊपर से एक पर्त है आस्तिकता की, स्किन डीप। चमड़ी जरा - सी खरोंच दो, नास्तिक बाहर आ जाता है। और वह जो भीतर है, वही असली है। व... |
ं है कहने का कि तुम झूठ बोल रहे हो। यह घर तो बड़े आनंद से भरा है। आग कहां लगी है! तू बिलकुल कमजोर है। तो तू कहता है कि बात समझ में आती है कि घर में आग लगी है, फिर भी छोड़ने का मन नहीं होता। ये दोनों बातें विरोधी अगर घर में आग लगी है, तो छोड़ने का मन होगा ही। छोड़ने का मन कहना भी ठीक नहीं है। घर में आग लगी हो, तो आपको प... |
ि अश्रद्धा करके हम अपनी शक्ति नष्ट करें ?
वह जो अश्रद्धा कर रहा है, वह असल में श्रद्धा की तलाश में है। वह चाहता है कि हो। लेकिन उसे मालूम नहीं पड़ता कि है। इसलिए इनकार करता है। और इनकार करता है, तो पीड़ा अनुभव करता है।
इनकार पूरा होने दें। यह धार तलवार की गहरे उतर जाए और हृदय को काट डाले पूरा। आप प्रार्थना के रास्ते पर... |
है। इससे तकलीफ खड़ी होती है। लगता है, काश, हम भी ऐसा नाच सकते! लेकिन जिस कारण मीरा नाच रही है, उसके लिए तर्कयुक्त प्रमाण नहीं मिलते। किस ईश्वर के लिए नाच रही है, वह ईश्वर कहीं दिखाई नहीं पड़ता। हजार शंकाएं बुद्धि खड़ी करती है।
तो हम कहते हैं, कोई ईश्वर वगैरह नहीं है। तो फिर मीरा पागल है, दिमाग इसका खराब है, ऐसा कहकर अप... |
है। इस नाच के पीछे कुछ अलौकिक खड़ा है।
वह अलौकिक की श्रद्धा न हो, तो नाच तो आप भी सकते हैं, लेकिन आपकी आत्मा में आनंद पैदा नहीं होगा। नाच बाहर - बाहर रह जाएगा। आप भीतर खाली के खाली, रिक्त, उदास, वैसे के वैसे रह जाएंगे।
मीरा की श्रद्धा ही केंद्र है। आप संदेह के केंद्र पर नाच सकते हैं, लेकिन मीरा के सुख की अनुभूति आपको ... |
कम डेढ़ सौ गोली के निशान हैं। और हर निशान चाक के एक गोल घेरे के ठीक बीच केंद्र पर है। डेढ़ सौ !
सेनापति चकित हो गया। इतना बड़ा निशानेबाज इस छोटे गांव में कहा छिपा है! और जो चाक का गोल घेरा है, ठीक उसके केंद्र पर गोली का निशान है। गोली लकड़ी को आर - पार करके निकल गई है। और एकाध मामला नहीं है, डेढ़ सौ निशान हैं !
उसे लगा... |
देह ही आपको समर्पण तक ले आया। इससे उलटा कभी भी नहीं हुआ है।
सभी संदेह करने वाले, सम्यक संदेह करने वाले, राइट डाउट करने वाले लोग समर्पण पर पहुंच गए हैं। अश्रद्धा ही श्रद्धा का द्वार बन जाती है। मगर पूरी अश्रद्धा । अनास्था ईमानदार, प्रामाणिक अनास्था आस्था की जननी है।
थोपें मत। ऊपर - ऊपर से थोपें मत। ऊपर की चिंता मत करें।... |
तो आदमी पूछता है, पता नहीं, पानी है या नहीं! प्यासे आदमी ने अब तक नहीं पूछा है कि पानी है या नहीं! प्यासा आदमी पूछता है, पानी कहां है? कैसे खोजूं?
ईश्वर के प्रमाण की जरूरत क्या है? आपके भीतर ईश्वर के बिना बेचैनी है, यह काफी प्यास है। और यही उसका प्रमाण है। इस बात के फर्क को समझ लें।
एक आदमी पूछता है, ईश्वर है या नहीं, ... |
लने नहीं आएगा।
लेकिन आप तृप्त हो नहीं सकते। यह कठिनाई ईश्वर की नहीं है। यह आदमी के आदमी के होने के ढंग की कठिनाई है। आदमी इस ढंग का है कि बिना ईश्वर के तृप्त नहीं हो सकता। और इसलिए जब हम आदमी से ईश्वर छीन लेते हैं, तो वह न मालूम किस-किस तरह के ईश्वर गढ़ लेता है।
रूस में एक बड़ा प्रयोग हुआ कि कम्युनिस्टों ने ईश्वर छीन ल... |
दो और दो चार होते हैं, ऐसा कोई गणित हो। कोई तर्क नहीं है, जिससे साबित किया जा सके कि वह है।
और अच्छा है कि कोई तर्क नहीं है। क्योंकि तर्कों से जो सिद्ध होता है, वह और कुछ भी हो - गणित की थ्योरम हो, विज्ञान का फार्मूला हो - धर्म की अनुभूति नहीं होगी। और अच्छा है कि तर्क से वह सिद्ध नहीं होता, क्योंकि तर्क से कोई चीज कि... |
क बच्चे की आंखों में झांकें; और एक काई जमे हुए पत्थर को देखें; और सागर के किनारे की रेत को, और सागर की लहरों को - तो फिर हर जगह उसका प्रमाण है। फिर वही वही है ।
एक दफा खयाल में आ जाए कि वह है, तो फिर सब जगह उसका प्रमाण है। और जब तक उसका खयाल न आए, तब तक उसका कोई प्रमाण नहीं है। |
"हुजूर, माई-बाप, मुझ पर कैसी विपदा आ पड़ी है। कल रात जवान लड़के को पाखाना हुआ। मैं गरीब भीख माँग कर खाने वाला आदमी। डॉक्टर का खर्चा कहाँ से लाता? सोच रहा था, सुबह होते ही सरकारी अस्पताल ले जाऊँगा। डॉक्टर बाबू के पाँव पडूँगा। क्या कहूँ हुजूर, भगवान बड़ा ही निष्ठुर है। मुझसे मेरा कालिया छीन लिया। सुबह होते-होते बेटे की न... |
नारा लगाइए "शासक दल, मुर्दाबाद, मुर्दाबाद! प्रधानमंत्री, लौट जाओ, लौट जाओ!"
कोई घुड़सवार तेजी से घोड़ा रपटते हुए जा रहा है। घोड़ा? रपट नहीं रहा है, उड़ रहा है। चारो तरफ धूएँ जैसे कुँहासे के भीतर घुड़सवार उड़ते हुए जा रहा है, ये कैसा घोड़ा है? पक्षीराज? एकदम झकझक सफेद घोड़ा। उसके ऊपर किस तरह वह राजा का मुकुट पहनकर बैठा... |
हुए हैं स्लोगन - "प्रधानमंत्री लौट जाओ"। खूब सारी जीपें इधर से उधर भाग रही हैं। कहीं शासक दल के झंडें दिख रहे हैं। कहीं-कहीं पर विरोधी दल के झंडें। कहीं अधिकारीगण व्यग्र होकर भाग रहे हैं। चारों तरफ माइक बज रहे हैं। चारों तरफ प्रचार-पत्र नजर आ रहे हैं।
"बंधुगण! बंधुगण! प्रधानमंत्री की सभा को सफल बनाइए। प्रधानमंत्री को क... |
ैं। हमारी तरफ तो काम करने के लिए मजदूर तक नसीब नहीं हो रहे हैं। तब सभा में आने की किसको फुर्सत है? पार्टी की तरफ से प्रति व्यक्ति पाँच रुपया दिया जा रहा था, फिर लोग आने के लिए राजी नहीं हो रहे थे. वो तो मैं हूँ जो उन्हें एक आदमी के लिए आठ रुपए देकर लाया हूँ। तीन रुपए मैने अपने हाथ से लगाए हैं। आप समझ जाइए साढ़े चार सौ ... |
से गाँव में? इतनी सुबह -सुबह किसान अपना हल लेकर खेत की तरफ जा रहा है। कोई आदमी अपने दोस्तों के साथ हँसते-हँसते तालाब की तरफ जा रहा है। एक ओह, इतनी सुंदर राजकन्या! इतनी सुंदर कन्या होती भी है क्या? अगर थोड़ी सी भी धूप लग गई तो सारा सौन्दर्य दुःख और कष्ट में पिघल जाएगा। आहा, यह सुंदर कन्या ऐसे ही हमेशा हँसती रहे। घोड़ा स... |
े ही छोडिएगा। आप इतने सीनियर आदमी हो। बहुत सारी प्रेस कान्फ्रेंस का भी अनुभव है आपको। याद है ना, रिलीफ कमीशनर के कान्फ्रेंस की सारी बातें।
"देखिए हुजूर, मुझ पर कैसी आफत आ पड़ी है।" नाक से नेटा बह रहा है। फों करके उसनेनाक साफ कर दिया। उसके मुँह से कुछ भी बात नहीं निकल रही है। जमीन पर बिछी हुई धोती की तरफ उसने एक नजर घुम... |
ों में घोड़ा अचानक चौंककर खड़ा हो गया। कुछ लोग सामने में घोड़े पर भागते हुए इधर आ रहे थे। राजकुमार की पोशाक धारण किया हुआ दस-बारह साल का लड़का अचानक चौंक पड़ा। कौन हैं वे लोग? क्या दस्युगण? या शत्रु राज्य की सेना? कमर में कसी हुई तलवार को अपनी मुट्ठी से जोर से पकड़ लिया।
"महाराज, महाराज! हमारी मदद कीजिए, महाराज।" आगंतु... |
कुछ तो अपने राज्य को दे रहा है। अरे, लोचन, सात प्लेट चावल और सात फुल प्लेट चिकन इधर ले आ।"
प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री बैठे हुए थे। पहना हुआ था उन्होंने सफेद कुर्ता और सफेद चूड़ीदार पायजामा। सिर के ऊपर थी गाँधी टोपी। दो या तीन ऊँगलियों में धारण किए हुए थे रत्न जडित सोने की अंगूठियाँ। हाथ पर एक कीमती घड़ी, पाँव मे... |
ताहत नहीं होते। सरकार यह बात पहले से जानती थी कि उड़िसा के इन इलाकों में तेज आँधी-तूफान आ सकते हैं, तब बचाव के उपायों की व्यवस्ता क्यों नहीं की गई?"
"कोई भी प्राकृतिक आपदा कितनी भी भयंकर हो, गाँव के सारे लोगों को उनकी जमीन-जायदाद छोड़कर हटाना क्या इतना सहज है? धन दौलत, जमीन-जायदाद तथा उनसे जुड़ी हुई उनकीस्मृतियाँ,उनके ... |
घूम-घमकर 'समाज' कार्यालय पहुँचने पर पता चलेगा कि कोई और फोटोग्राफर फोटो देकर जा चुका है। अगर 'समाज' ऑफिस के लिए बक्शी बाजार की तरफ से जाते हैं, तो बिहारी बाग पहुँचते-पहुँचते पता चलेगा कि 'प्रजातंत्र' कार्यालय में किसी दूसरे फोटोग्राफर ने फोटो दे दिया है। ऊपर से न्यूज एडीचटों का भाव। कहने लगेंगे, मेरा स्टॉफ भी फोटोग्रा... |
वाले कर्मचारीगण उसकी अवहेलना करते हैं। ऊपर के अधिकारी उसको उचित सम्मान नहीं देते हैं क्योंकि वह एक प्रमोटेड आई.ए.एस ऑफिसर है। ऐसी ही कुछ हीन-भावना हमेशा उसके मस्तिष्क में छाई रहती है।
तभी एस.पी. ने आकर कुछ कागज उसके सामने रख दिए।
"इन सब कागजों पर हस्ताक्षर कर दीजिए। आवश्यकता पड़ने पर काम आएँगे।"
"ये सब क्या कागज हैं? आ... |
िकली कि मुख्यमंत्री सचिवालय में बैटकर केवल अधिकारिक निर्णय लेते हैं। किसी ने यह बी नहीं कहा कि खदान मालिकों का रायल्टी माफ करने के लिए मुख्यमंत्री नेचार करोड़ रुपए की घूस ली है। किसी ने एक बार भी यह आवाज नहीं उठाई कि फुलवाड़ी जिले में डोनामाइट खदान कीलीज अवैध तरीके से आवंटित करने के लिए एक कंपनी से भीतर ही भीतर साँठ-गा... |
री की उन तमतमाई आँखों का वह र्इंट का जवाब पत्थर से देगा। प्रधानंत्री को बी यह बात समझ में आ जाएगी कि मंगलू स्वाँई कितना ताकतवर है।
उसके जैसी एक मिल जाए तो जीवन में उसके कोई चाह बाकी नहीं रहेगी. उसने राजकुमारी को हथेली से पकड़ लिया। उसकी मुलायम-मुलायम हथेलियों से उसका सारा शरीर सिहर उठा। कितनी सुंदर अनुभूति थी वह!
राजकु... |
"
जैसे ही सब हँसने लगे, वैसे ही सेंस ऑफ ह्रूमर के लिए विख्यात विरोधी दल के नेता ने अचानक सबके सामने एक चौंकने वाली खबर दी "आप सभी के लिए एक खुशी की खबर है। प्रधानमंत्री की मीटिंग से स्वाँई ने बॉयकट कर दिया है। वह पार्टी छोड़ने को तैयार हो सकता है। अगर मंगलू स्वाँई अपने साथ बीस विधायक लेकर आता है तो हमारे लिए दस-पंद्रह ... |
टे।"
बूढ़ा ड़र रहा है। इतनी भयंकर भीड़। इतनी भयंकर भीड़ का बूढ़े ने कभी सामना नहीं किया था. जहाँ पकड़े गए, वहाँ मारे गए। यहां से निकलते ही, थोडा-बहुत नाश्ता कर लेने के बाद खिसकना पड़ेगा। बूढ़े ने मन ही मन सोच लिया है, यहाँ से खिसकते ही कटक जाना उचित रहेगा। खाना-पीना भी कटक में ही खाया जाएगा। उसके बाद जितना जल्दी हो सके... |
को देखकर भीड़ डर से तितर-बितर होने लगी। कुछ लोग प्रधानमंत्री के भाषण की उपेक्षा पुतलाजलाने के कार्यक्रम को बड़े चाव से देखने लगे। वे जलते हुए पुतले के चारों तरफ खड़े हो गए। प्रदीप ने जोर से नारा लगाया, "प्रधानमंत्री, मुर्दाबाद!"
अभी केवल उसके समर्थक ही नहीं वरन अन्य लोग भी उत्तेजित होकर चिल्लाने लगे, "मुर्दाबाद, मुर्दा... |
ें नहीं खोल पा रहा था। तभी किसी ने उसके पेट पर लाठी से वार कर दिया। उसने अपनी आत्मरक्षा के लिए ज्यों ही हाथ ऊपर किया, वैसे ही लाठी का दूसरा वार हुआ। उस वार से उसके हाथ की हड्डी टूट गई। टूटी हुई डाल की तरह उसका हाथ झूलने लगा। सारे शरीर में दर्द के मारे वह कराहने लगा।
राजकुमारी कहने लगी, "राक्षस आने का वक्त हो गया है। रा... |
ो पीछे धकेलते हुए भीड़ आगे बढ़ी जा रही थी। 'मेरे बेटे, मेरे बच्चे, मेरे लाड़ले' रोते-रोते कहते-कहते वह भीड़ के बहाव में दूर फेंका गया। नीचे गिरा हुआ था उसका लड़का। किसी के पाँव से टकराया तो वह आदमी उसको फाँदकर आगे निकल गया। उसके बाद तो फिर कहना ही क्या, लातों के ऊपर लातें। कुछ खाली पाँव, तो कुछ जूते पहने हुए, तो कुछ चप... |
े में रिपोर्ट देते समय यह फोटो नहीं भी चलेगा तो कोई बात नहीं, मगर आँधी-तूफान, अकाल आदि किसी भी परिस्थिति में यह फोटो काम आ जाएगा। अंतिम बचे हुए एक फ्लैश बल्ब की सहायता से पुण्यश्लोक ने इस दृश्य को अपने कैमरे में अंकित कर लिया और खुश होने लगा।
पुण्यश्लोक द्वारा लिए गए फोटो का दृश्य इस प्रकार था। शिरीष पेड़ के सहारे बैठक... |
एक बार देवलोक की परम सुंदरी अप्सरा उर्वशी अपनी सखियों के साथ कुबेर के भवन से लौट रही थी। मार्ग में केशी दैत्य ने उन्हें देख लिया और तब उसे उसकी सखी चित्रलेखा सहित वह बीच रास्ते से ही पकड़ कर ले गया।
यह देखकर दूसरी अप्सराएँ सहायता के लिए पुकारने लगीं, "आर्यों! जो कोई भी देवताओं का मित्र हो और आकाश में आ-जा सके, वह आकर ह... |
और अपने आप पीछे मुड़कर राजा की ओर देखने लगी।
चित्रलेखा सब कुछ समझती थी। बोली, "यह तो छूटती नहीं दिखाई देती, फिर भी कोशिश कर देखती हूँ।" उर्वशी ने हँसते हुए कहा, "प्यारी सखी। अपने ये शब्द याद रखना। भूलना मत।"
राजा का मन भी उधर ही लगा हुआ था। जब-तक वे सब उड़ न गई; तब तक वह उधर ही देखते रहे। उसके बाद बरबस रथ पर चढ़कर वह ... |
अच्छे नहीं लगते थे। इसलिए उन्होंने विदूषक से कहा, "कोई ऐसा उपाय सोचो कि मेरे मन की साध पूरी हो सके।"
विदूषक ऐसा उपाय सोचने का नाटक कर ही रहा था कि अच्छे शकुन होने लगे और चित्रलेखा के साथ उर्वशी ने वहाँ प्रवेश किया।
उन्होंने माया के वस्त्र ओढ़ रखे थे, इसलिए उन्हें कोई देख नहीं सकता था, वे सबको देख सकती थीं। जब प्रमद वन ... |
त्र रखने को दिया था वह कहीं उड़ गया है। वह डरने लगा कि कहीं महाराज उसे माँग न बैठें। यही हुआ भी। पत्र न पाकर महाराज बड़े क्रुद्ध हुए और तुरंत उसे ढूँढ़ने की आज्ञा दी। यही नहीं वह स्वयं भी उसे ढूँढ़ने लगे।
इसी समय महारानी अपनी दासियों के साथ उधर ही आ रही थी। उन्हें उर्वशी के प्रेम का पता लग गया था। वह अपने कानों से महार... |
ी नहीं मानीं तो वह भी क्रुद्ध हो उठे।
देवसभा में भरत मुनि ने लक्ष्मी-स्वयंवर नाम का जो नाटक खेला था, उसके गीत स्वयं सरस्वती देवी ने बनाये थे। उसमें रसों का परिपाक इतना सुंदर हुआ था कि देखते समय पूरी-की-पूरी सभा मगन हो उठती थी। लेकिन उस नाटक में उर्वशी ने बोलने में एक बड़ी भूल कर दी। जिस समय वारुणी बनी हुई मेनका ने, लक्... |
ं सुनकर महारानी मुसकुरा उठीं। उन्होंने सबसे पहले गंध-फलादि से चंद्रमा की किरणों की पूजा की, फिर पूजा के लड्डू विदूषक को देकर महाराज की पूजा की। उसके बाद बालीं, "आज मैं रोहिणी और चंद्रमा को साक्षी करके आर्यपुत्र को प्रसन्न कर रहीं हूँ। आज से आर्यपुत्र जिस किसी स्त्री की इच्छा करेंगे और जो भी स्त्री आर्यपुत्र की पत्नी बन... |
द महाराज पुरुरवा ने राजकाज मंत्रियों को सौंप दिया और स्वयं गंधमादन पर्वत पर चले गए। उर्वशी साथ ही थी। वहाँ वे बहुत दिन तक आनंद मनाते रहे। एक दिन उर्वशी मंदाकिनी के तट पर बालू के पहाड़ बना-बनाकर खेल रही थी कि अचानक उसने देखा- महाराज एक विद्याधर की परम सुंदर बेटी की ओर एकटक देख रहे हैं। बस वह इसी बात पर रूठ गई और रूठी भी... |
ओ।
सज्जन लोग अपने मित्रों की सहायता करना अपने स्वार्थ से बढ़कर अच्छा समझते हैं। हे हंस! तुम तो ऐसे ही चलते हो, जैसे उर्वशी चलती है। तुमने उसकी चाल कहाँ से चुराई। अरे,तुम तो उड़ गए। (हँसकर) तुम समझ गए कि मैं चोरों को दंड देनेवाला राजा हूँ। अच्छा चलूँ, कहीं और खोजूँ।"
फिर वह चकवे के पास जा पहुँचते। उससे वही प्रश्न करते, ... |
सुनी करके दूसरी ओर मुँह फेर लिया।ठीक ही है, जब खोटे दिन आते हैं तो सभी दुरदुराने लगते हैं। लेकिन तभी उन्होंने लाल अशोक के पेड़ को देखा। उससे भी वही प्रश्न किया और जब वह हवा से हिलने लगा तो समझे कि वह मना कर रहा है - उसने उर्वशी को नहीं देखा।
इसी प्रकार पागलों की तरह प्रलाप करते हुए जब वह यहाँ से मुड़े तो उन्हें एक पत्थ... |
सेवक महारानी के माथे की मणि ताड़ की पिटारी में रखे ला रहा था कि इतने में एक गिद्ध झपटा और उसे मांस का टुकड़ा समझकर उठाकर उड़ गया। यह समाचार पाकर महाराज आसन छोड़कर दौड़ पड़े। पक्षी अभी दिखाई दे रहा था। उन्होंने अपना धनुषबाण लाने की आज्ञा दी।
लेकिन जबतक धनुष आया तब तक वह पक्षी बाण की पहुँच से बाहर निकल चुका था और ऐसा लगन... |
गा कि उसे कसकर छाती से लगा ले। पर ऊपर से वह शांत ही बने रहे। उन्होंने तापसी को प्रणाम किया आशीर्वाद देकर तापसी ने कुमार से कहा, "बेटा, अपने पिताजी को प्रणाम करो।"
कुमार ने ऐसा ही किया। महाराज ने उसे गदगद होकर आशीर्वाद दिया और तब तापसी बोली, "महाराज! जब यह पुत्र पैदा हुआ तभी कुछ सोचकर उर्वशी इसे मेरे पास छोड़ आई थी। क्ष... |
माला पहने, वह ऐसे लगते थे जैसे सुनहरी शाखावाला कोई चलता-फिरता कल्पवृक्ष चला आ रहा हो। पूजा-अभिवादन के बाद उन्होंने कहा कि मैं देवराज इंद्र का संदेशा लेकर आया हूँ। वह अपनी दैवी शक्ति से सबके मन की बातें जाननेवाले हैं। उन्होंने जब देखा कि आप वन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्होंने कहलाया है -- "तीनों कालों को जाननेवाले... |
एक मंजिल ही नहीं ए मेरे दिल,
जिंदगी और भी है।
अब तक तुमने जो जाना है, वह कुछ भी नहीं अक्षय विवेक ! अभी असली तो जानने कोशेष है। अब तक तुमने जो जीआ है वह कुछ भी नहीं, अक्षय विवेक ! असली जीने को तो अभी शेष है।
" है कोई लेवनहारा" -- उसी के लिए पुकार उठाई जा रही है। और तुम्हारे हृदय तक पुकार पहुंची। अब साहस करो। अब हिम्मत ज... |
यवस्था नहीं। प्रार्थना तो मस्ती है, उन्मत्तता है, दीवानगी है। प्रार्थना तो परमात्मा की शराब को पी लेने का नाम है।
बस मत कर देना अरे पिलाने वाले! हम नहीं विमुख हो वापस जाने वाले! अपनी असीम तृष्णा है --तेरा वैभव अक्षय है अक्षय--अरे लुटाने वाले! हम अलख जगाने आए तेरे दर पै! हम मिट जाने आए तेरे दर पै!
इस रिक्त पात्र को भर द... |
ल को चांद-तारों के सामने फैला देना।
कहने की बात नहीं। प्रार्थना एक भाव - दशा है, वक्तव्य नहीं। कोई हरे कृष्ण, हरे राम, ऐसा कहने से कोई
प्रार्थना नहीं होती। कि "अल्ला-ईश्वर तेरे नाम, सबको सनमति दे भगवान," ऐसा कहने से प्रार्थना नहीं होती! प्रार्थना मौन निवेदन है।
प्रार्थनाझुकने की कला है। जहां झुक जाओ घुटने टेक कर पृथ्वी... |
करोगे, प्रेम-पत्रों का ?
मुल्ला ने कहाः अब तुझसे क्या छिपाना, एक पंडित जी से लिखवाता था! और अभी मेरी जिंदगी खत्म तो नहीं हो गई। अभी किसी और से प्रेम करूंगा। अब नाहक फिर पंडित जी को पैसे देने पड़ेंगे। तू लौटा दे वे प्रेम-पत्र, फिर मेरे काम आ जाएंगे। जरा नाम ऊपर का बदल दिया।
प्रेम-पत्र भी तुम दूसरों से लिखवाओगे? प्रार्थन... |
पहचानना और उसके पीछे चले चलना । वह कच्चा सा धागा तुम्हें परमात्मा तक पहुंचा देगा; या उस कच्चे धागे में बंधा हुआ परमात्मा तुम तक आ जाएगा। कुछ भी हो, बूंद सागर में गिरे कि सागर बूंद में गिरे, बात एक ही है।
छठवां प्रवचन
विद्रोह के पंख
पहला प्रश्नः ओशो! किसी अन्य आश्रम से--जैसे युग निर्माण योजना, मथुरा; रामकृष्ण आश्रम आदि-... |
; इसलिए डरते हैं, इसलिए भयभीत होते हैं।
श्रद्धालु को कोई भय नहीं है। रामकृष्ण में जिसकी श्रद्धा है वह मुझमें भी रामकृष्ण को ही पाएगा। मेरे कारण रामकृष्ण में उसकी श्रद्धा कम नहीं होगी, बढ़ेगी। और अगर मेरे कारण कम हो जाए तो न तो उसने रामकृष्ण को पहचाना है और न अभी श्रद्धा से उसका कोई संबंध हुआ है। स्वर होंगे अलग, गीत तो ... |
है। और कृष्ण के वचनों में कुछ है जो जीसस के वचनों में नहीं है। कृष्ण के वचनों में एक अपूर्व सुसंस्कृत अभिव्यक्ति है। जीसस के वचनों में एक ग्राम्य सौम्यता है, सरलता है, सीधापन है, सादगी है। बुद्ध के वचनों में कुछ है--सम्राट के बेटे के वचन हैं - बहुत परिष्कृत हैं। कबीर के वचनों में भी कुछ है -- माटी की सुगंध है। होंगे ब... |
है। इसलिए डरे हुए हैं।
नास्तिक से बात करने में आस्तिक डरता है, यह कैसा आस्तिक? नास्तिक नहीं डरता, आस्तिक डरता है! मैंने किसी नास्तिक को आस्तिक से बात करते डरते नहीं देखा। और मैं तथाकथित आस्तिकों को नास्तिकों से बात करते डरते देखता हूं। यह तो बड़ी उलटी बात हो गई। नास्तिक डरे, अकेला है बेचारा, ईश्वर का कोई सहारा नहीं है... |
के भीतर शरण मिलती हो तो उससे तो बेहतर हाथी के पैर कि नीचे दब कर मर जाना है।
तुमने घंटाकरण की कहानी तो सुनी है न, जो अपने कानों में घंटे बांधे रखता था! ये तुम्हारे आस्तिक बस घंटाकरण हैं। वह कानों में घंटे बांधे रखता था, क्यों? ताकि उसके कान में उसके इष्ट देवता के अतिरिक्त और कोई नाम सुनाई न पड़े। अगर उसके इष्ट देवता राम... |
े मानूं? इसे कभी पता चल सकता है, क्योंकि इसने अपने अज्ञान को छिपाया नहीं, स्वीकार किया है। और अज्ञान की स्वीकृति सत्य की तरफ पहला चरण है।
तो पहली तो बात, युगल किशोर, जिन मित्रों की तुम पूछ रहे हो उनकी आस्था झूठी है, उनकी श्रद्धा बांझ है। दूसरी बात, जहां-जहां वे अटके हैं वहां उन्हें कुछ मिला नहीं, नहीं तो यहां आने की जर... |
के। जरूरी नहीं है कि तुम्हें नहीं मिला, इसका यह अर्थ है कि वहां नहीं है। तुमसे तालमेल न बैठा हो, तुम्हारे व्यक्तित्व के अनुकूल न पड़ा हो।
रामकृष्ण सभी के अनुकूल नहीं पड़ सकते, नहीं तो वैविध्य मिट जाए। किसी को कुरान ही जमती है और कुरान के वचन ही किसी के प्राणों में पड़े हुए जन्मों-जन्मों के बीजों को अंकुरित करते हैं। और... |
आत्मा प्रसन्न होगी, आनंदित होगी, कि तुम फिर तलाश पर निकल पड़े हो, शायद कोई द्वार मिल जाए। वह द्वार तो बंद हो गया।
जैसे ही कोई सदगुरु विदा होता है इस पृथ्वी से, उसकी सुगंध आकाश में लीन हो जाती है, पीछे छूट जाते हैं पग-चिह्न और पग-चिह्नों के आस-पास इकट्ठे पंडितों पुरोहितों की भीड़। और पंडित-पुरोहित बड़े कुशल हैं शोषण करन... |
ात्मा अभी भी चुक नहीं गया है, अभी बहुत महावीर होंगे और बहुत बुद्ध होंगे और बहुत मोहम्मद होंगे और बहुत जीसस होंगे। और परमात्मा तब भी चुकेगा नहीं। नये-नये वाद्य जुड़ते जाएंगे, संगीत और सघन होता जाएगा, संगीत और गहन होता जाएगा। कृपण न बनो, कंजूस न बनो । हृदय को खोलो इस विराट आकाश के प्रति। पूरे परमात्मा को ही अंगीकार करो, ... |
ं सचेष्ट करता हूं। बुद्धिमान व्यक्ति तो जहर से भी अमृत बना लेता है और बुद्धू अमृत से भी जहर।
विज्ञान ने बहुत बड़ी शक्ति मनुष्य के हाथ में दी है-- टेक्नालॉजी की, यंत्र-विधि की। इससे यह सारी पृथ्वी स्वर्ग बन सकती है। सदियों-सदियों का सपना, जो हम देखते थे कहीं दूर आकाश में स्वर्ग है, वह पृथ्वी पर उतर सकता है। इस पृथ्वी पर... |
हो कि चरखे का गीत गाए जाते हो!
इस सदी के पूरे होते-होते तुम्हें पता चलेगा कि गांधीवाद के नाम पर तुमने जो मूढ़ता की है, इससे बड़ी और कोई मूढ़ता नहीं हो सकती थी। गांधी को भविष्य का कोई बोध नहीं था। गांधी मरे - मराए अतीत के प्रशंसक थे। वे रेलगाड़ी के खिलाफ थे, टेलीफोन के खिलाफ थे, पोस्ट आफिस के खिलाफ थे, दवाइयों के खिलाफ... |
ं, उनको भय है कि अगर दुनिया की पूंजी भारत में आए, और दुनिया का विज्ञान भारत में आए तो उनके कचरा उत्पादन की क्या कीमत रह जाएगी! तुम सोचते हो एंबेसेडर कार की कितनी कीमत होगी? बैलगाड़ी से कम हो जाएगी! अगर इस देश में फोर्ड और शेवरलेट और रॉल्स रॉयस और बें.ज, ये सारे कारखाने खुल जाएं तो एंबेसेडर गाड़ी का तुम सोचते हो क्या हा... |
कि अगर हम अपने द्वार खोल दें तो यह देश समृद्ध हो सकता है। लेकिन हम पिटी-पिटाई बातें दोहराए चले जाते हैं।
हमारे अर्थशास्त्री कौन हैं? चौधरी चरणसिंह जैसे लोग हमारे अर्थशास्त्री हैं। जिनको अर्थशास्त्र का अ ब स भी नहीं आता। अनर्थशास्त्र का आता होगा, अर्थशास्त्र का बिल्कुल नहीं आता। वे अभी तक गांवों का गुणगान किए जा रहे हैं... |
़ते जाते हैं उतना ही सवाल उठता है कि बेकार आदमियों का क्या करना? लेकिन पश्चिम में समझ है। यहां तो काम जो करता है उसको भी तनख्वाह नहीं मिलती, लेकिन पश्चिम के समृद्ध देशों में जो काम नहीं जिसे मिलता है, उसे काम नहीं मिलने की तनख्वाह मिलती है। बेरोजगारी के लिए तनख्वाह मिलती है। क्योंकि वह भी जिम्मा समाज का है। अगर तुमने य... |
ली आदमी जो बैठता, आलसी होता, उसकी निंदा करनी होती थी। नये भविष्य में जब यंत्र सारा उद्योग हाथ में ले लेंगे तो हमें कहना पड़ेगाः खाली बैठो, खाली बैठना भगवान का मंदिर है। मैं उसी खाली बैठने की कला को सिखा रहा हूं, ध्यान कह रहा हूं उसको। तो ध्यान अनिवार्य होगा।
कला के नये-नये आयाम हमें खोल देने चाहिए, जो सिर्फ राजाओं-महार... |
पर कारें और बसें न रह जाएं, कारखाने बंद हो जाएं, जरा
सोचो सात दिन के लिए सब बंद हो जाएं, जैसे विज्ञान रहा ही नहीं, विज्ञान ने जो भी दिया सात दिन के लिए बंद हो जाए, तुम्हारी दुनिया की क्या स्थिति होगी? सात दिन में भस्मीभूत हो जाएगी। सात दिन में सब गिर जाएगा।
तीन दिन के लिए अमरीका के कुछ नगरों में बिजली चली गई, तो बड़ी ह... |
ान के खतरों से बच सके और विज्ञान का सदुपयोग कर ले। जरूरी नहीं है कि विज्ञान जंगलों को काटे । हमने गलती से काट डाले हैं।
विज्ञान ने अब इस तरह की सुविधा जुटा दी है कि अगर हम चाहें तो समुद्र में बस्तियां बस सकती हैं, जंगल काटने की जरूरत नहीं है। समुद्र में बस्तियां तैराई जा सकती हैं। जमीन पैदावार के काम में लाई जा सकती है... |
्य स्वर्ग बन सकती है कि हमारी सारी कल्पनाएं फीकी पड़ जाएं! स्वर्ग की जो हमने कल्पनाएं की थीं, वे फीकी पड़ सकती हैं। शक्ति हमारे हाथ में है। समझ अभी हमारे हाथ में नहीं है।
राजकुमार, तुमने पूछाः "एक ओर तो आप आधुनिक यंत्र - विधि के पक्ष में हैं और मानते हैं कि धर्म का फूल औद्योगिक दृष्टि से उन्नत देशों में ही खिलेगा।"
निश... |
ैंः किसको बनाया आज, आज किसको फांसा, आज कौन लुटा? जो नहीं देता, भिखमंगा जानता हैः होशियार आदमी है। भिखमंगे के मन में सम्मान उसका है जो नहीं देता उसको, क्योंकि वह देखता है कि मेरी बातों में नहीं आता। लेकिन भिखमंगे तुम्हारे पुराने संस्कारों को जगा लेते हैं।
तुम अगर भूखे हो तो मंदिर में जाकर भी मांगोगे क्या? रोटी, रोजी, कप... |
ड़ गए, गल गए। अब इस सड़े-गले देश में धर्म की बात करनी मखौल उड़ाना है, लोगों का मजाक करना है। धर्म तो औद्योगिक रूप से संपन्नता में ही पैदा होगा।
तो निश्चित ही मैं कहता हूं कि उन्नत देशों में ही धर्म का सूरज ऊगेगा।
और तुमने पूछा हैः "दूसरी तरफ आप पश्चिम की औद्योगिक सभ्यता की विडंबनाओं का बखान भी करते
निश्चित ही! अगर मैं ... |
ठीक दाएँ जहाँ 'लर्न इंगलिश विद दीपिशखा क्लासेज' का बोर्ड था और बाएँ 'तीन महीने में वजन घटाएँ' का ऐलान करती होर्डिंग, उसने अपने संस्थान का बोर्ड लगवाया था और यह उसे खासा उत्साहित करता था 'रिलेशनशिप' बढ़ते-बढ़ते दोनों बोर्डों को निगल चुका था। उसकी वर्कशॉप में ज्यादातर युवा होते या अभी-अभी युवावस्था का पड़ाव पार किए प्रौढ... |
नहीं था और बाद में उसने जाना कि दुनिया में यही सबसे ज्यादा कीमती चीजें हैं। उन्हें चाहे जैसे प्रयोग कर सकते हैं। उसने इसका व्यवसायिक प्रयोग किया और आजकल शहर में बड़े आदमियों में गिना जाता है।
उस रहस्यमयी महिला का फोन जिस दिन आया वह रात में बिस्तर पर लेटा अपनी दूसरी प्रेमिका को याद कर रहा था और संसार के इस झूठ पर मुस्क... |
लिखवाना। वह किसी ऐसे इनसान की तलाश करे जो उसकी तरह की महिलाओं को पसंद करता हो और अगर प्रेम का रिश्ता निभाने में कोई दिक्कत आती है तब वह उसे निस्संकोच संपर्क करे। वह कुछ प्रकाशन संस्थानों से बात करे और उन्हें इस बात पर राजी करे कि वह उसका शोधग्रंथ छाप दें।
उसकी दोनों प्रेमिकाओं ने उससे बहुत टूट कर ठीक उसी तरह उससे प्रे... |
के उस सदस्य की तरह मानते थे जिसकी अरसा पहले मौत हो चुकी हो और उसकी बरसी भी धूमधाम से मनाते थे।
एक दृश्य में उसकी प्रेमिका उसे सिर्फ इसलिए छोड़ रही है कि उसे अचानक पता चल गया था कि वह अब भी, उस बला की खूबसूरत लड़की के उसके जीवन में आ जाने के बावजूद ईश्वर को नहीं मानता। पहले अगर नहीं मानता था तो कोई बात नहीं थी, लेकिन अब... |
से पहले इतना पी ले कि मरते वक्त दर्द का एहसास न हो। मरना मुश्किल काम है, यह पहला पैग जज्ब होते ही उसे समझ में आ गया था। उसने ढेर सारी सिगरेटें पीं और उनका धुआँ बाहर नहीं निकाला। उसने अँधेरे से खूब बातें कीं और उसे बताया कि वह हमेशा से उससे प्रेम करता है। अँधेरे ने उससे कहा कि वह खूब पीए और उसकी बाँहों में खुद को ढीला छ... |
म कर कुछ पैसे बनाने के बाद उसने एक प्रयोग के तौर पर एक हफ्ते के लिए अपनी कंपनी में ही 'रिश्ते कैसे निभाएँ' नाम की कार्यशाला शुरू की थी जिसने उसकी तकदीर बदल दी।
उस महिला का नाम अप्रतिममाधुरी था और वह अपने नाम की तरह ही अजीब थी। जब वह उससे मिलने आई तो आते ही उसने सबसे पहला सवाल यही पूछा कि क्या उसने किसी से प्रेम किया है... |
हँसते रहते थे।
आवश्यकता है एक ऐसे इनसान की जिसकी जिंदगी में हवा से ज्यादा प्रेम हो। जो मानता हो कि प्रेम से पेट भी भर सकता है। एक ऐसी महिला को अपने लिए प्रेमी की जरूरत है जिसके अंदर ढेर सारा प्रेम भरा हुआ है। तलाश है एक ऐसे इनसान की जो इतना प्रेम सँभाल सके...। जो पिछले एक वर्ष में कभी किसी चिड़िया की मौत पर रोया हो, क... |
ा हूँ और भागते-भागते मेरे मन में कोई भूला सा खयाल परेशान करता हुआ पूछता है कि भागते हुए मैं जो छोड़ता जा रहा हूँ उसका नाम क्या है ?
क्योंकि हम ही रखते हैं उन्हें...।' उसने सरल भाव से कहा।
सुप्रीमो धीरे-धीरे अप्रतिम के लिए सचमुच चिंतित होने लगा था। पहले उसका सोचना था कि अप्रतिम को किसी भी ठीकठाक लड़के के साथ जोड़ दिया ज... |
उसकी साँसों में शामिल हो रही है।
'हाँ-हाँ क्यों नहीं आइए।' एएम अपने बिस्तर पर लैपटॉप पर कुछ कर रही थी। वह सीधी होकर बैठ गई।
'क्या कर रही थी?' उसने एक तरफ बैठते हुए पूछा।
उसने लैपटॉप सुप्रीमो की तरफ मोड़ दिया। सुप्रीमो ने कुछ देर तक स्क्रीन पर निगाहें जमाए रखीं। उसके चेहरे के भाव बदलने लगे।
'क्या तुम्हारा कोई ब... ब...... |
। उसकी झल्लाहट कभी-कभी हद से पार हो जाती तो वह रिश्तों के जाल पर अपनी लिखी कोई किताब पढ़ने लगता। इससे भी हारता तो डायरी लिखने लगता।
- लगता है जिंदगी फिर से मुझे अपने जाल में जकड़ रही है। जिंदगी की पकड़ में आने का मतलब है मौत के लिए तैयार रहना, ठीक उसी तरह जैसे किसी रिश्ते को शुरू करने का मतलब है उसके खात्मे के लिए तैया... |
ुम्हें मुकुट पहनाएगा उसी तरह सूली पर भी चढ़ाएगा। जिस तरह वह तुम्हारे विकास के लिए है, उसकी तरह तुम्हारी काट-छाँट के लिए भी। अनाज की बालियों की तरह वह तुम्हें अपने अंदर भर लेता है। तुम्हें नंगा करने के लिए कूटता है। तुम्हारी भूसी दूर के लिए तुम्हें फटकता है। तुम्हें पीसकर श्वेत बनाता है। तुम्हें नरम बनाने तक गूँथता है। ... |
ें गूँजने लगीं। अचानक वह खाना छोड़ उठ खड़ा हुआ।
'क्या हुआ...?' एमआर हैरानी में था।
'बाहर निकलो। मेरे सामने से हटो वरना मैं कुछ कर बैठूँगा...।' वह आखिरी लाइन कुछ इस आवाज में चिल्लाया कि एमआर डर गया और अपना हाथ पास पड़ी नैपकिन में पोंछ, अपना बैग उठा निकल गया।
सुप्रीमो पास रखी कुर्सी पर निढाल सा टेढ़ा हो गया। उसने एमआर की... |
र लेता हूँ। वह बहुत कमजोर हो गई है। ऐसी बीमारी उसे वाकई है, मुझे अब भी विश्वास नहीं होता। उसकी दवाइयाँ उसके साथ हँसी खेल कर रही हैं। मगर अब भी वह हर दूसरे रविवार को विज्ञापन जरूर निकलवाती है। मैं बहुत मना करता हूँ कि अब उसे साक्षात्कार लेने नहीं बैठना चाहिए लेकिन वह नहीं मानती और दो दिन खूब हँसती है और दो दिन खूब रोती ... |
ुष की बात पूरी तरह भूल चुका था। उसकी मन हो रहा था कि वह पूरी तरह से खुद को भुला दे। उसे अचानक ही उस दिन भुवनेश्वर की बेतरह याद आई और शक भी हुआ कि क्या वह कभी वाकई इस नाम के आदमी से मिला था।
उसने अपनी मिलास, एक बोतल जो रूस से उसका एक शिष्य लाया था और कुछ नमकीन लेकर लॉन में मेज पर ले आया। एएम बरामदे से बाहर आकर खड़ी हो ग... |
आवाज में पूछा।
'नहीं नहीं वो सारा आपका था।' उसने मुस्कराती आवाज में कहा।
वह चुप हो गया। इसके बाद के संवाद बोलने में उसे नशे में भी शर्म आई। उसने मन में कहा 'उसमें से एकाध दोगी?' और पलटकर जाने लगा।
'आप और लेंगे?' एएम ने पलँग से उतरते हुए पूछा।
वह चुपचाप उसकी ओर देखने लगा और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे जो धीरे-धीरे अतिक... |
कहा कि उसके मन में भावुक लोगों के लिए बहुत सम्मान होता है क्योंकि वे बहुत मजबूत और बहुत कोमल होते हैं। वह किचेन में चली गई।
दस साल का समय भी भुवनेश्वर के चेहरे पर कोई असर नहीं छोड़ पाया था। उसे आश्चर्य हुआ जब भुवन इतनी आसानी से मिल गया। उसे लगा था कि अगर वह उसे खोजने निकलेगा तो कभी नहीं खोज पाएगा, इसलिए अपने आप को इस ... |
ग रूटीन सा बन गया था। मगर जो टूटता है उसे ही रूटीन कहते हैं।
'यहीं सो जाओ न...' उसने पलट कर जाते सुप्रीमो की कलाई पकड़ ली।
वह धीरे से उसके बिस्तर पर आ गया और एएम एक बच्चे की तरह उसके सीने में दुबक आई।
'तुम एकदम छोटी बच्ची जैसी लग रही हो।' वह उसे अपनी बाँहों में कसता हुआ फुसफुसाया।
'अगर खामोशी टूट गई तो तुम बच्चे हो जाओ... |
केला महसूस किया था। वह पूरी दुनिया में अकेला रह गया था और इस बार उसके मन में पहले से भी ज्यादा सवाल अनसुलझे छूटे थे। उसने अपना इंस्टीट्यूट नहीं खोला और कई जन्मों तक सिर्फ घर में कैद पुरानी राहों में भटकता रहा। घर के सारे फोन, सारे नौकर, ई-मेल और मोबाइलों को अपनी जिंदगी से बाहर निकाल दिया। उसका मन करता था कि भुवनेश्वर क... |
लगाने में मुश्किल हुई। वह सड़क पर चलता हुआ अपने मकान की ओर जा रहा था। अपने इलाके में पहुँचने से कुछ पहले ही उसने यूँ ही आसमान की तरफ देखा और देखता ही रह गया। आसमान में भरी रात दो इंद्रधनुष खिले थे। उसने अपने आस पास देखा कि किसी को इसके बारे में बता सके। पूरी सड़क खाली थी। एक पल को यह भ्रम लगा । इतनी रात में आखिर इंद्रध... |
बेटे ने पिता के हाथ से बैग झटके से छीन दूर फेंक दिया ।
" कहीं नहीं जाना है ! "
" मुझे रोकेगा ? तेरी इतनी हिम्मत ! "
" हिम्मत तो बहुत है , कहिये तो दिखाता हूँ ? "
" गया जी जा रहा हूँ ,धर्म -कर्म करने , क्या तू मुझे अब धर्म करने से भी रोकेगा ? "
" धर्म -करम... ! .... हुंह ! ....... आप वसीयत बदलने के फ़िराक में हो , मैं स... |
साथ रिपोर्ट तैयार नही की तो चैनल का टी.आर.पी कैसे ...?"
" हाँ , टी.आर.पी .......मेरे सपने तुम्हारे सपनों से ज्यादा ऊँचे है।"
कंधे पर टंगे बैग और हाथ में पकड़े हुए पर्चों के साथ कमल अपनी ही धुन में मस्त हुआ चौधरी साहब के ढाबे में घुसा। सामने दीवार पर उनकी माला लगी तस्वीर देखकर वह चौंक गया।
"चल भाग यहाँ से..बड़ा आया दानव... |
त से बाहर आकर, कमल ने हाथ में पकड़ा हुआ 'अंगदान महादान' का पर्चा मोड़कर वापस अपने बैग में रखा और ढाबे से बाहर आ गया।
आज दिल्ली मेट्रो में मंटो से मुलाकात हो गई ।
दुआ सलाम के बाद ठंडा गोश्त अफ़साने के अदालती मसले पर मालूमात की।
उन्होंने दिल्ली के हालात जानना चाहे।
यहां ,यहां दिल्ली में तो जिंदा गोश्त पर तकरीरें चल रहीं ... |
्र देख कर लोग अचंभित थे , माननीय का नया बँगला किसी महल से कम नहीं था। तस्वीरों में अंकित चित्र भी अपनी अपनी कथा कह रहे थे। कहीं कोई शेर किसी निरीह जानवर पर झपट रहा था तो कहीं अलंकृत राजसी वैभव का चित्र चमत्कृत कर रहा था। कुछ पौराणिक चित्र भी थे। सबसे ज्यादा भीड़ कौरवों के दरबार में हुए चीर - हरण प्रसंग की विशाल पेंटिंग... |
वह तो मैं समझ रहा हूँ। शौहर के इंतक़ाल के बाद तुम्हारे बच्चे अपना करियर बनाने बड़े शहरों में जम गए, ससुराल वालों से कोई सहारा भी नहीं तुम्हें, आख़िर कैसे अकेले ख़ुश रह रही हो तुम ?"
"अब्बू, ख़ुदा का करम है कि मुझे अनुकम्पा नियुक्ति मिल गई, बस नौकरी, ट्यूशन और घर गृहस्थी की मशरूफ़ियत में पता ही नहीं चलता कि वक़्त कैसे ग... |
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